त्रिपुरा और अनानास: एक पुराना रिश्ता
अगर कोई त्रिपुरा का नाम ले और साथ में अनानास की बात न करे, तो बात अधूरी लगती है। यहाँ अनानास सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और कमाई का बड़ा सहारा है। त्रिपुरा उन गिने-चुने राज्यों में है जहाँ अनानास की खेती सबसे ज़्यादा और सबसे अच्छे स्तर पर होती है।
त्रिपुरा का मौसम और ज़मीन अनानास के लिए बिल्कुल मुफ़ीद है। यहाँ ज़्यादा गर्मी भी नहीं पड़ती और बारिश भी समय पर होती है। पहाड़ी और ढलानदार ज़मीन पर पानी रुकता नहीं, इसी वजह से अनानास की फसल यहाँ अच्छी होती है। बहुत से किसान सालों से इसी खेती पर निर्भर हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी यह काम चलता आ रहा है।
यहाँ दो तरह के अनानास ज़्यादा उगाए जाते हैं — क्वीन और क्यू। लेकिन अगर बात स्वाद की हो, तो क्वीन अनानास का जवाब नहीं। यह अनानास छोटा होता है, लेकिन बहुत मीठा और खुशबूदार होता है। इसी खासियत की वजह से त्रिपुरा के क्वीन अनानास को GI टैग भी मिला, जिससे इसकी पहचान पूरे देश में बनी।
धलाई, खोवाई, उनाकोटी, सिपाहीजला जैसे इलाकों में अनानास के बड़े-बड़े खेत दिख जाते हैं। बरसात के मौसम में जब फसल तैयार होती है, तो पूरे इलाके में अनानास की खुशबू फैल जाती है। बहुत से छोटे किसान अपनी मेहनत से इसी खेती से घर चला रहे हैं, बच्चों को पढ़ा रहे हैं और रोज़गार पा रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में सरकार ने भी इस ओर ध्यान दिया है। किसानों को बेहतर पौधे, ट्रेनिंग और बाज़ार तक पहुँच दिलाने की कोशिश हो रही है। आज त्रिपुरा का अनानास सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों और यहाँ तक कि विदेशों तक भेजा जा रहा है।
अनानास से सिर्फ फल बेचने तक ही बात नहीं रुकती। इससे जूस, जैम और दूसरे प्रोडक्ट बनाकर भी लोग कमाई कर रहे हैं। इससे गाँवों में रोज़गार के नए मौके बने हैं।
कुल मिलाकर, अनानास त्रिपुरा की पहचान बन चुका है। यह खेती न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि पूरे राज्य का नाम भी रोशन कर रही है। अगर सही सपोर्ट और सुविधाएँ मिलती रहीं, तो आने वाले समय में त्रिपुरा का अनानास और भी आगे जाएगा।

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